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Showing posts from August, 2014

मॉडल नए विकास की - A Poem by Me

आओ जनता तुम्हे दिखाए मोडल नए विकास की, जनता को है मूर्ख बनाता मोडल एक विनाश की ! पानी नहीं अब तेल बहेगा तालाबिकरण की पूरि तैय्यारी है, सरकार की नैय्या तो पार लग गयी अब जहाज़ और शिकारों की बारी है ! बनारस अब कश्मीर बनेगा घाटों को अब पहचान मिलेगा, किसानों को रोज़गार बढेगा क्यूंकि तरबूज नहीं अब कमल खिलेगा !   खेतों में अब बिजली बनेगा सिंचाई के लिए भी पानी मिलेगा, हवा में भी अब धातु मिलेगा पारा के साथ आर्सेनिक भी मिलेगा ! काले पत्थर के खनन में देखो सरकार कैसे अंग्रेज़ बन रहे, बिजली घर के ताप में, धुएं में, राख में, कोयले के साथ घर और खेत जल रहे ! किसानों को अब नौकरी मिलेगी गरीबी के साथ बिमारी मुफ्त मिलेगी,  देखो शहर वालों विकास देखो गाँवों जंगलों का विनाश देखो ! जमुना तो दम तोड़ चुकी थी   नर्मदा अब भी लड़ रही है, गंगा भी दम तोड़ रही थी महानदी भी रो रही है ! जल जंगल जमीं की लड़ाई में किसान बन रहे है नक्सलाईट नए आजादी की लहर उठी है क्यूंकि लोकतंत्र अब है Modified!! - देबादित्यो सिन्हा    People of Chhattisgarh protesting against a coal mine.

Power play at a Thermal Power Plant in Mirzapur | EJOLT

August 21, 2014 | Debadityo Sinha Another 1320 MW thermal power plant is coming up in Mirzapur, in the state of Uttar Pradesh in India. The Indian company Welspun’s investment of approx. 1400 million USD in the plant is part of the national path towards an increase of use of coal for energy generation purposes in the subcontinent. As per the draft of the 12 th Five Year Plan of the Planning Commission of India , the target of addition capacity of 88,425 MW is proposed, out of which 71,228 MW of the power will come from thermal power plants based on coal, lignite and gas. What concerns the environmentalists at Mirzapur is the impact due to the thermal power plant which is not just restricted to the project site only but the transportation of coal, laying pipelines, impact from withdrawal of water from a river etc which goes unaccounted in the Environmental Impact Assessement. The project is now awaiting Final Environment Clearance from the Central Government.

भारत तेरी गंगा मैली ! ( एक कविता )

Ganga is treated as Goddess and evening prayer is being offered at several places on river bank. This picture is one of the Evening Prayer at Varanasi, taken January, 2011. गंगा को बचाने की कोशिश यूँ तो हुई है हज़ारों बार गंगा बचाओ गंगा बचाओ शुरू हुआ एक कारोबार । प्लान पॉलिसी की आड़ में बढ़ते गए और अत्याचार अत्याचार पर रोक लगाने चुन आई नयी सरकार । गंगाजी के विकास को नालों के निकास को संतों की बकवास को लिखा गया इस बार । अविरल हो, निर्मल हो कुछ नहीं तो सम्मान हो बहने दो बस बहने दो बस यही एक मांग है । नदी हूँ मैं नदी हूँ मैं बहना ही मेरा काम है भूल से भी ये मत भूलो गंगा भी मेरा नाम है । - देबादित्यो सिन्हा

Article Published in India Together: Reviving the Ganga, at the cost of its ecology!

This is my article published in India Together on 9th August, 2014. It highlights the ecological concerns of the Ganga Rejuvenation plan which chiefly focused on Ganga waterway. A must read! GANGA WATERWAY Reviving the Ganga, at the cost of its ecology! The Rs 6300-crore plans for development of the Ganga waterway from Allahabad to Haldia should be undertaken only after meticulous examination of its impact on various elements of river ecology. Debadityo Sinha explains why.  Original Link