पिछले तीन साल में.. एक वृत्तान्त बी.एच. यू. से..



ये तो आप सभी लोगों को पता है कि मेरा अनुभव कितना मज़ेदार और रोमांचक रहा है.. मैंने यहाँ हमेशा हर दिन एक नए चुनौती के साथ जिया... एक वक्त तो ऐसा भी था जब सुबह उठते ये नहीं पता रहता था की आज होने क्या वाला है.. खैर जैसा भी हो.. मैंने ये ३ साल में कई बड़े काम किये.. कई लोग आये कई लोग गए... कुछ लोगों को हमेशा से ही मुझसे परेशानी रही है..  और मोटा मोटी कहूँ तो सबसे ज्यादा परेशानी मेरे काम से रही है.. मैं M.Sc. Tech  में  दाखिले से खुश जितना हूँ उतना ही अपने आपको भाग्यशाली भी महसूस करता हूँ.. आज अपनी खुशियां आपके साथ ज्यादा बाटूंगा...

खुशी इस बात की सबसे ज्यादा है की मुझे MSc.Tech की बदौलत ही हिन्दुस्तान के गाँव को करीब से देखने का मौका मिला... मैंने पिछले 3 सालों में जितना कुछ भी देखा बहुत नया था..
और उतना ही मुझे उन लोगों पर गुस्सा आया जो अपने आप को पढ़ा लिखा कहते हुए भी अपने देश के लोगों को २ वक्त की रोटी नहीं दिला सकता.. जहाँ जातिवाद के नाम पर खाना और पानी बटता है... मुझे घृणा है उनलोगों से जो सरकार की खुशामदी कर कर के अपनी जेबें गरम कर रहे है... आप लोग ऐसी पढाई से बचिए जो आपको अंधा बनाती है...

दूसरी खुशी की बात.. मुझे MSc.Tech की बदौलत ही पहले से कहीं ज्यादा ख्याति मिली... मेरे करीब जो रहते है उनमें कुछ ही लोगों को पता होगा यहाँ आने से पहले मेरा background क्या रहा है.. मैंने अपने graduation के second year  से ही इस पर्यवरण को राक्षसों से मुक्त करने का ठाना हुआ था..  लेकिन मिर्ज़ापुर में पिछले 3 सालों में मैंने कई बड़े कामों को अंजाम दिए... मैंने हमेशा लोगों के मन से डर और गलत फेह्मिओं को हटाया.. टांडा फाल जहां लोग जाने से डरते है.. सुरक्षा का कोई इन्तेजाम नहीं था... हमारे कुछ ठोस कदम से आज वहाँ की सुरक्षा बहुत अच्छी है.. वो मेरा पहले operation था... विंढम फाल जहां जाने से हमें पहले रोका जाता था... आज सिर्फ RGSC के छात्रों के मिलीजुली प्रयास से.. पहली बार उसकी सफाई अभियान चली.. और उस अभियान का ये सफल उदाहरण है की DFO  वहाँ खुद आये और सारी समस्याओं को सुना और वादा किया हमसे कि अब विंढम फाल पे सुरक्षा और सफाई दोनों के पर्याप्त उपाय किये जाएंगे.. मेरी सोच हमेशा से यही रही है कि अगर आप अपने आप को सही मायने में educated मानते है तो पहले अपने आसपास को बेहतर बनाइये.. वहीँ आपने शिक्षा का सबसे बेहतरीन सफलता है..

तीसरी खुशी की बात ये रही कि.. मैंने यहाँ मेरी तीसरी फिल्म ‘विन्ध्य की व्यथा’ पूरी की जिसको पूरा करने में मुझे २ साल से अधिक का समय लग गया.. पर फिल्म बनने के बाद हर किसी ने सराहा.. मैंने वो फिल्म पूर्णत अपने खर्चे से बनाया और यही फिल्म अब विन्ध्य बचाओ movement का प्रेरणास्रोत भी है.... इस फिल्म को बनाने में मैं मिर्ज़ापुर में हर तरह के आदमिओं के संपर्क में आया.. मीडिया का सहयोग तो शुरू से ही रहा है.. कुछ माफिआओं से भी मिला.. कुछ नेताओं से भी मुलाकात की और कई अफसरों के साथ भी मुलाकात हुई.. यहाँ पर मैंने एक ही चीज़ सीखा और जो आपलोगों के लिए बहुत ही ज़रुरी भी है.. कुछ भ्रष्ट और चालाक लोगों को देखकर आप निराश कतई मत होइए.. बी.एच.यू. के ही एक प्रोफ़ेसर के संपर्क में मैं हाल ही के दिनों से आया जिनकी एक बात मुझे बहुत अच्छी लगी कि.. 121 करोड के आबादी वाले भारत देश में जहां बड़े बड़े घोटाले जैसे 2G, commonwealth और न जाने क्या क्या हुए... हमारी GDP अभी भी 6% की दर से देश को आगे बढ़ा रही है.. अच्छे और ईमानदार लोग आपको हर जगह मिल जाएंगे.. और बुराई कितनी भी ताकतवर क्यूँ न हो अगर सारे सही सोच रखने वाले लोग एक मत हो जाए तो कोई बुराई ज़्यादा देर तक अच्छाई पर हावी नहीं हो सकती ... मेरे इसी प्रयास का नतीजा था क मिर्ज़ापुर के वरिष्ठ पत्रकार शिव कुमार जी ने अपना घर मुझे trust के नाम पर दे दिया.. और मुझे फक्र है इस बात का कि ‘Vindhyan Ecology and Natural History Foundation’ नाम से हमने विन्ध्य के संरक्षण के लिए पहली संस्था की शुरुआत भी मिर्ज़ापुर से किया.. मेरी व्यक्तिगत व्यस्तता काफी बढ़ गयी है पिछले कुछ महीनों से इसलिए कुछ ठोस कार्य भले ही अबतक शुरू नहीं कर पाया पर सही वक्त आने पर वो भी होगा...

अब बात मेरी चौथी खुशी की.. Eco One.. अब इसके बारे में मुझे आप लोगों को introduction देने की ज़रूरत नहीं है.. ये वो अधूरा काम था जिसके लिए मैंने 1.5 साल इन्तज़ार किया सिर्फ सही लोगों का साथ पाने के लिए... मैंने अपनी पिछली गलतिओं से सबक लिया... और कुछ organisational बदलाव के साथ इसको शुरू किया.. मुझे कुछ लोगों ने पूछा था की क्या Green Militia  जैसी दुखद घटना के बाद इस तरह की पहल ठीक है.. मैंने उनसे मालवीयजी की वो बात याद दिलाया कि कोई भी बड़ा काम परस्पर भरोसे और आपसी सहयोग के बिना सफल नहीं होता है.. मुझे पूरा भरोसा था अपने नए Vice Chancellor प्रोफ. लालजी सिंह पर... जिसदिन मैंने उनको पहली बार RGSC  में अपने research paper छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करते देखा मुझे अंदर से अहसास हुआ.. ये ही है वो लालजी सिंह जिसके बारे में मैं अपने शिक्षकों से सुनता आया हूँ... और उस दिन मुझे उनके बातों से या उनके हाव भाव से लगा कि वह विश्वविद्यालय का भला चाहते है.. एक अच्छे शुरुआत की वह स्वागत ज़रूर करेंगे.. मैंने हमारे OSD प्रोफ. रवि प्रताप सिंह जी से इस विषय में बात की और सारी बातें खुलकर समझाया.. .. और मुझे लगता है कि इस परिसर के लिए हमें उनसे बेहतर  कोई और नहीं मिलता.. उन्होंने उसी दिन प्रोफ. गुरुप्रसाद जी  से मेरी मुलकात करवाई और कहा कि ऐसे काम के लिए आपका स्वागत है.. गुरुप्रसाद सर के बारे में मैं जितना कहूँ उतना कम है.. परिसर में छात्र उन्हें बहुत मानते है.. और इको वन से जुड़े 200 लोगों ने उन्हें गुरु का दर्जा दिया है.. मुझे बेहद खुशी है कि इको वन के ज़रिये ही सही मुझे ऐसे लोगों के बेहद करीब जाने का मौका मिला.. और आप सबको पता ही है कि 24 मार्च को  कुलपति कार्यालय से मेरे पास खुशखबरी आई कि कुलपति जी अब इको वन के संरक्षक बन गए है.. ये मेरी उपलब्धिओं में एक और उपलब्धि भी बन गयी... हमलोगों ने परिसर को कूडामुक्त करने के लिए zero waste policy लाने में भी पूरी कोई कसर नहीं छोड़ा और कुछ दिनों में वो तैयार हो कर आपलोगों के समक्ष आ जाएगा..
इसे भी पढ़े: Eco One: The Journey till now...

अंत में मैं आप सब को एक बात कहना चाहता हू.. खासकर हमारे छोटे भाईओं और बहनों को ... प्यार और भरोसे से बढ़कर दुनिया में कोई चीज़ नहीं है... खुली सोच और मेहनत से आप किसी भी बुलंदी तक पहुँच सकते है... चापलूसी और खुशामदी मत कीजिये.. ये चीज़ें आपको कुछ देर के लिए बाकिओं से आगे ज़रूर ले जाती है पर लंबे समय में आपकी अपनी महनत और काबिलियत ही आपको सफल बनाएगी और भविष्य में आपके बच्चों के आगे सर उठाके जीने का मौका देगी... अपनी सोच रखिये और तथ्यों में सिर्फ सुनके ही यकीं मत कीजिये.. ये आपके व्यक्तित्व के लिए बहुत ज्यादा ज़रुरी है की आप सही और गलत का फैसला अपने खुद के दिमाग से ले न की इस बात से ले की कौन कौन लोग उस बात से जुड़े है.. चुप मत रहिये... अपने आप को सही रखिये और गलत लोगों से हमेशा दूरी बनाये रखिये... जब आप गलत लोगों के साथ अपना मेल जोल बढ़ाते है तो आप अच्छे लोगों से भी दूर चले जाते है..

और मेरा धन्यवाद उन सभी आलोचकों का जिनके वजह से मैं आज इतनी सारी उपलब्धियां हासिल कर पाया.. जब तक रुकावट ना हो काम पूरा करने का मज़ा भी उतना नहीं आता... मुझे कभी भी उनके व्यक्तिगत जीवन से कोई मतलब नहीं पर मुझे खुशी इस बात कि है कि उनसब को मेरे जीवन से काफी लगाव रहा है और उससे बड़ी उपलब्धि ये कि वो लोग अपना समय मेरे को लेकर बातचीत करने में ही व्यतीत करते रहे है... इतना बड़ा दर्जा देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद उनलोगों का..

इन तीन सालों में मैं ज़्यादातर अकेले ही रहा पर भीड़ से हमेशा घिरा रहा. कई लोगों को मैंने बहुत ही करीब से जाना और जानने के बाद उनसे उतनी ही घृणा भी हुई.. मुझे हमेशा से एक बात लगती रही है कि ये लोग इतने नादान है या फिर अपने नैतिकता से मरे हुए है.. उन सब के बारे में यहाँ बात करके मैं अपना समय खराब नहीं करूँगा.. जब तक आप आग से जल नहीं जाते आग से तब तक आप सावधान नहीं रहते.. पर ये बात हमेशा याद रखिये कि जब आप गलत लोगों के साथ अपना मेल जोल बढ़ाते है तो आप अच्छे लोगों से भी दूर चले जाते है.. और साथ ही दिखावे कि जिंदगी से दूर रहिये.. सरल और सत्यवान बने रहना ही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है.. इसलिए सही लोगों का साथ दीजिए और अच्छे कामों में लगे रहिये.. यही आपको एक अच्छा इंसान बनाने के साथ ही हिम्मत भी देगा.. इतिहास गवाह है कोई भी अच्छे काम करने वाले को उसके आस पास के लोगों से ही सबसे ज्यादा  विरोध मिलता है.. पर इस वजह से अपने आप को विचलित मत करिये और अपना काम करते रहिये क्यूंकि आप उनके लिए काम नहीं कर रहे है और ना ही उनका आपके काम में कोई महत्व है.. प्रभु इसा मसीह को भी सूली पे चड़ा दिया गया था पर क्या उन्होंने कभी अपना सर झुकाया? यही वो ताकत है जो सिर्फ सरलता आर सत्य के मार्ग पर चलने से मिलती है..

पिछले तीन सालों में मैंने बहुत कुछ सीखा और जिस तरह लोहा गरम होने के बाद और मजबूत बनता है ठीक उसी प्रकार मैंने भी अपने आप को हर दिन के साथ और शक्तिशाली बनाया और पहले से कहीं ज्यादा समझदार भी पाया.. शुरू के 2.5 साल भले ही बड़े चुनौतीपूर्ण रहे पर आखरी 5 महीने मेरे लिए बेहद अच्छे रहे और ऊपर वाले की मेहरबानी ही है कि कुछ काम बड़े ही तेज़ी के साथ हुए जिनकी उम्मीद मुझे खुद नहीं थी...

अंत में मैं धन्यवाद करना चाहूँगा यहाँ पे कुछ लोगों का जिन्होंने हमेशा मेरी मदद की और उस वक्त मेरा साथ दिया जब मैं अपने बुरे समय से गुजर रहा था.. अजय स्वामी जो कि हमारे सीनिअर रहे है उनसे मैं बहुत करीब हूँ और मुझे बड़े भाई की तरह उनका साथ हमेशा से मिलता रहा.. नवेन्दु, जयदेव और आशुतोष जैसे कुछ जूनियर भी मिले जो मेरे भाई जैसे है.. साथ ही मुझे इस सेमेस्टर में अपने कुछ नए जूनियरों से भी मुलाकात हुई जिनको देखकर लगता है कि हमारी अगली पीढ़ी वाकई जागरूक है और मेरी शुभकामनाये हमेशा उनके साथ रहेंगी.. उनसे मैं एक ही बात करूँगा कि अपनी ऊर्जा को बर्बाद ना करे और अच्छे कामों के लिए उसको सहेज कर रखे..  और ये पंक्ति आप सब के लिए..

जंगल में राज करना है तो शेर बनके जीयो यारों... वरना झुण्ड में तो गीदर भी शिकार कर ले जाते है..


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